क्या होगा अगर 5 मिनट के लिए पृथ्वी पर मौजूद पानी बर्फ़ में बदल जाये?

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क्या होगा अगर 5 मिनट के लिए पृथ्वी पर मौजूद पानी बर्फ़ में बदल जाये? अगर 5 मिनट के लिए पृथ्वी पर मौजूद पानी बर्फ़ में बदल जाये तो पृथ्वी पर ठंड बहुत ही ज्यादा बढ़ जाएगा। सारी वस्तुएं बर्फ में जम जाएगी। अचानक ठंड बढ़ जाने के कारण लोगों का स्वाथ भी बिगड़ जाएगा, ओर काफी लोग ठंडे वातावरण के कारण बराफ में जम कर मार जायेगे।

अगर 5 मिनट की बात है तो जान माल का काफी नुकसान होगा मगर वही इंसान मरेगा जो अंदर से कमजोर होंगे जो 5 मिनट के बर्फ में नही रह सकता है वो मर जायेंगे , छोटे बच्चे की भी जान जा सकती है । अचानक ठंडी बढ़ने के कारण वातावरण बदलने के कारण लोगों का स्वास्थ बिगड़ जाएगा। लेकिन यह संभव नहीं है। अगर एकाएक भी हुआ तो ये भी देखा जाएगा कि बर्फ पिछलने की मात्रा कितनी है लोग जान बचाने के लिये ऊंची जगह चले जायेंगे , जो सामान पानी मे डूब गए उनमे खराबी आ सकती है ।

कुल मिलाकर यह कहना है कि 5 मिनट के बर्फ के पानी से दुनिया की जिंदगी बदल नही जाएगी , अगर यह भयंकर गर्मी में हुआ तो लोग कुदरत का करिश्मा देखकर मस्ती करेगे , भले ही जाड़े के कपड़े गर्मी में भी क्यो न पहनने पड़े। लोग भयंकर गर्मी में में भी ठंडी का अहसास करेंगे।

बर्फ पानी पर क्यू तैरते हैं?

बर्फ पानी पर क्यू तैरते हैं?
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बर्फ इसलिए पानी पर तैरती है, क्योंकि बर्फ का जो घनत्व है वह पानी से कम होता है. सरल भाषा में हम यह कह सकते हैं,कि बर्फ पानी पर इस लिए तैरती है, क्योंकि यह पानी की तुलना में काफी ज्यादा हलकी होती है, ओर जमने के बाद बर्फ ज्यादा जगह घेरती है, जिसके कारण बर्फ का घनत्वल पानी के घनत्वय से कम हो जाता है और यही कारण है, कि बर्फ पानी पर आसानी से तैरने लगती है.

परंतु अक्सर जब कोई भी तरल पदार्थ ठोस पदार्थ में बदल जाता है, तो उस वस्तु का आयतन घट जाता है, और वह वस्तु भारी हो जाता है।

जब कोई भी वस्तु पानी में तैरती है, तो यह उसके घनत्व पर निर्भर करता है। इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण है, और उसे आर्किमिडीज के सिद्धांत के रूप में जाना जाता है।आर्किमिडीज के सिद्धांत में यह कहा गया है, कि किसी भी वस्तु को पानी के ऊपर तैरने के लिए, उस वस्तु के वजन के बराबर पानी की मात्रा को विस्थापित करना होता है. ओर हम सब तो यह जानते है, कि जो ठोस वस्तु होता है, उस वस्तु में तरल पदार्थ की तुलना में अधिक घनत्व होता हैं. जो ठोस वस्तुओ में अणु को एक-दूसरे के साथ अधिक निकटतापूर्वक बंधे होते हैं, जिसकी वजह से यह वस्तु कठोर होते है और उन वस्तु में वजन भी अधिक होता है.

क्या होगा अगर पृथ्वी पर उपस्थित सारी बर्फ पिघल जाए?

क्या होगा अगर तेजी से होते हुए वातावरण में परिवर्तन के कारण धरती पर मौजूदा सारी की सारी ही बर्फ एक ही दिन में पिघल जाए और कल सुबह आप अपने को पानी में डूबता हुआ पाए| तो उस समय आप को अपनी ज़िंदगी के आखिरी पल अपनी आँखों के सामने देख कर कैसा लगेगा?

लेकिन इसमें कोई घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि यह घटना रातोंरात नहीं होने सकता | क्यूकी बर्फ पृथ्वी के 80 लाख वर्ग मील क्षेत्रफल में फैली हुई है| यदि सारी बर्फ रातोंरात पिघल जाएगी तो पृथ्वी के समुद्र का स्तर लगभग 230 फीट ऊपर बढ़ जाएगा, और पृथ्वी पर मौजूद सभी सातों महाद्वीप पानी के नीचे डूब जाएंगे।

ओर जो बरफ पिघल जाए गी वह वायु में कार्बन-डाई ऑक्साइड (CO2) गैस छोड़ेगी, जिसके कारण पर्यावरण में ऑक्सीजन (O2) की मात्रा काफी कम होने लगेगी और जीव-जातियों ओर मनुष्य को सांस लेना मुश्किल हो जायेगा |

समुद्र के स्तर बढ़ने से समुद्री धाराओं में भी काफी ज्यादा परिवर्तन होगा, जिसके कारण रेगिस्तानी क्षेत्रों में काफी ज्यादा वर्षा होगा और उन सभी क्षेत्रों में सूखापन होगा, जिस क्षेत्र में आमतौर पर भारी वर्षा होती है। जिसके कारण कृषि क्षेत्र पर इसका काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ेगा जोकि पूरे विश्व के अकाल का कारण बनेगा।

पूरे विश्व में भारी वर्षा के साथ ही आने वाली बाढ़ और भारी चक्रवात हमारे जीवन को अस्त-व्यस्त कर देंगे। जिसके कारण मानव जीवन का इस पृथ्वी पर पूरी तरह से अस्तित्व समाप्त हो जायेगा| अगर पूरी तरह से मानव जीवन समाप्त नहीं हो पाए, तो को लोग बच जाएंगे वह नए घरों की तलाश में दुनिया भर में पलायन करेंगे।

अगर पृथ्वी से सारा पानी समाप्त हो जायेगा तो क्या होगा ?

यदि आपका सवाल यह है कि अचानक से ही सारा पानी खत्म हो जाए तो इसका तो सीधा सा जवाब यही होगा कि शायद ही पृथ्वी पर कोई सजीव वस्तु रहे | ओर धीरे-धीरे पूरी पृथ्वी पर सूखा पर जाए गा, पेड़ पोधे सूख जाए गा। ओर पानी के बिना सभी जीव मार जाएंगे।

अगर कोई देश साइंस तकनीकी द्वारा कृतिम रूप से वर्षा करता है, तो वह सीमित पानी मानुष के उपयोग के लिए ही हो पाए गए। पर हर देश के लिए ऐसा करना मुमकिन नहीं है। लेकिन अगर ऐसा हुआ तो मानुष के पास पानी सीमित मात्रा में होगे। वह पानी से अपनी जरूरत को तो पूरा कर सकेंगे।

परंतु वाता वातावरण में और भी सजीव प्राणी है, जिसे पानी की आवश्यकता पड़ेगा। ओर वह पानी की कमी के कारण मारने लगेंगे और पेड़ पोधे भी सूख जायेंगे। जिसके कारण वातावरण का संतुलन बिगड़ जाएगा, पेड़ पोधे सूख जाने के कारण ऑक्सीजन की कमी हो जाएगी, पृथ्वी पर सारे जीव जन्तु खत्म हो जाएंगे। और पनी के कारण पूरी पृथ्वी खत्म हो जाएगी।

अगर पृथ्वी पर 70% जमीन होती तो क्या होता?

ज्यादातर देश उत्तरी अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया की तरह होंगे – सीमा पर मौसम में गैरमामूली बदलाव होंगे जबकि अंदरूनी क्षेत्र बेहद गर्म और सूखे (या अंटार्कटिका की तरह बेहद ठंडे और सूखे) होंगे।

दिन-रात और गर्मी-सर्दी के तापमान में उतार-चढ़ाव कहीं ज्यादा होंगे।

लगभग स्थिरांक तापमान वाले उष्णकटिबंध क्षेत्र में होने वाली जैवविविधता और प्रजातीकरण को देखें तो वहां शायद पौधों और जीवों की कम प्रगतिशील प्रजातियों होंगी जिनकी संख्या भी कम होगी। खास तौर पर आंतरिक क्षेत्रों में।

अगर सभ्यताओं का विकास करने वाली प्रजातियां उभरती हैं, वे सभी तटीय क्षेत्रों के पास होंगी – उत्तरी अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया की तरह, लेकिन और ज्यादा।

क्या होगा अगर हमारी पृथ्वी अचानक से रुक जाए?

हम सभी जानते है कि पृथ्वी अपने अक्ष पर लगातार घूम रही है, और इसी घुमने की वजह से दिन और रात होते है, मौसम बदलते है और पृथ्वी का बैलेंस बना रहता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर पृथ्वी घूमना बंद कर दे तो क्या होगा? अगर नहीं सोचा है तो आज हम आपको बताने जा रहे है कि अगर पृथ्वी अचानक से घूमना बंद कर दे तो क्या होगा?

अगर पृथ्वी अचानक घूमना बंद कर दे तो वायुमंडल आगे की ओर घूमता रह जाएगा, भूमध्य रेखा पर मौजूद सभी चीज़े पूर्व दिशा में उड़ने लगेगी. पृथ्वी पर मौजूद सभी चीज़े और इंसान 1670 km/h की रफ़्तार से हवा में उड़ने लगेंगे.
-लगातार घूमते रहने की वजह से पृथ्वी का आकार गोल न होकर थोड़ा अंडाकार है. लेकिन घूमना बंद होने के बाद पृथ्वी गोलाकार हो जायेगी और समंदर का पानी सभी जगह पर सामान मात्रा में बटने लग जायेगा, नार्थ और साउथ पोल पानी में डूब जायेंगे.

भूमध्य रेखा पर भयंकर सुनामी आ जाएगी, और बहुत तेज गति से चलने वाली हवा की वजह से हवा में उड़ रहे सभी हवाईजहाज बैलेंस बिगड़ने की वजह से गिर जायेंगे.
-पृथ्वी के नहीं घूमने से चारों तरफ भयंकर तबाही मच जाएगी इंसान का अस्तित्व ही खतरे में आ जायेगा. इंसान, जानवर, जंगल, जमीन कुछ भी सलामत नही रहेगा. पृथ्वी पर जीवन ही ख़त्म हो जाएगा.

जो लोग अंतरिक्ष में होंगे उनके लिए भले ही बचने की संभावना हो सकती है लेकिन पृथ्वी पर वापस आने के बाद उनके स्वागत के लिए कोई इंसान या जीव बचा नहीं होगा.
-सब कुछ तबाह हो जाने के बाद सूरज एक ही जगह पर स्थिर दिखेगा क्योंकि पृथ्वी तो घूम ही नहीं रही है. इस वजह से एक दिन 24 घंटे की जगह 365 दिन का हो जाएगा.

नहीं घूमने की वजह से पृथ्वी का प्रोटेक्टिव मैग्नेटिक फिल्ड गायब हो जाएगा जिस वजह से पृथ्वी पर सूरज का हानिकारक रेडिएशन हमला कर देगा.
ये हो सकता है अगर पृथ्वी घूमना बंद कर दे.

क्या होगा अगर पृथ्वी पर बरसात हीं ना हो?

वर्षा (Rain fall) एक प्राकृतिक घटना है जिसमें जमीन का पानी वाष्पीकृत होकर आसमान में फैल जाता है और उचित समय पर गैस (वाष्प) से पुनः संघनन (वाष्पीकरण के विपरीत प्रक्रिया) द्वारा द्रव बनकर बूंदों के रूप में जमीन पर आता है और यही ऊंचे ऊंचे पहाड़ों पर बर्फ बनकर जमता भी है जो बाद में पहाड़ों से पिघल कर नदी के रूप में जमीन पर बहता है । यह एक ऐसी प्रक्रिया भी है जिसमें गंदा पानी भी स्वच्छ और साफ पानी बनकर पृथ्वी पर आता है । यह एक चक्र है जिसका फायदा पृथ्वी पर सभी तरह के जीव जंतु और पेड़ पौधे उठाते हैं ।

अगर बारिश न होगी तो धीरे धीरे भूमि पर रहने वाले सभी जीव खत्म होने लगेंगे । धीरे धीरे सम्पूर्ण भूभाग रेगिस्तान मे परिवर्तित हो जाएगा। सभी नदिया , तालाब , कुएं सूख जाएँगे। बारिश न होने के कारण फसले , पेड़ पोधे सब नष्ट हो जाएँगे और किसी को भी जीवित रहने के लिए आवश्यक भोजन नहीं मिलेगा क्योंकि इसके लिए हमें पूर्ण रूप से सिंचाई पर निर्भर करना पड़ेगा ।

दूसरी तरफ देखे तो हमारे देश की जलवायु को निम्नलिखित चार ऋतुओं में बाँटा गया है– शीत, ग्रीष्म, वर्षा और शरद ऋतु । दरअसल वर्षा ऋतु ग्रीष्म ऋतु और शरद ऋतु के बीच की कड़ी है । वर्षा की बूंदें ग्रीष्म की गर्माहट को धीरे-धीरे ठंडी करती हैं और फिर शरद ऋतु आता है । जो प्राकृतिक लगता है । इन सभी ऋतु में सबसे आनंद देने वाला ऋतु वर्षा ऋतु ही है । वर्षा ऋतु ना होने पर मनुष्य के जीवन पर यह बहुत दूर तक प्रभाव डालेगा ।

क्या होगा अगर पृथ्वी पर से 1 मिनट के लिए हवा खत्म हो जाए?

हवा खत्म हो जाए?

ऑक्सीजन जो कि प्राण वायु है… इसके बिना जिंदगी की कल्पना भी नहीं जा सकती… शरीर में एनर्जी ऑक्सीजन से बनती है…इमेजिन करिए कि अगर थोड़ी देर के लिए धरती से ऑक्सीजन गायब हो जाए, तो क्या होगा… आपको बता दें जैसे ही ऑक्सीजन खत्म होगी तो घुटन महसूस होगी…. दिमाग काम करना बंद कर देगा… ओर कुछ लोगो की मृत्यु भी ही सकती है।

ऐसा इसलिए होगा क्योंकि हमारी बॉडी में जितने भी सेल्स हैं उन सब को जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है… हर जीवित कोशिका फूलकर फूट जाएगी… पानी में 88.8 फीसदी ऑक्सीजन होती है… ऑक्सीजन न होने पर हाइड्रोजन गैसीय अवस्था में आ जाएगी… और इसका वॉल्यूम बढ़ जाएगा.. इससे हमारी सांस बाद में रुकेगी… हम फूलकर पहले ही फट जाएंगे… इतना ही कान का पर्दा भी फट जाएगा…. ऑक्सीजन नहीं होने पर हवा का दबाव घट जाएगा..ऐसे में हम सभी बहरे हो सकते हैं…

धरती बहुत ठंडी हो जाएगी… दिन में भी अंधेरा छा जाएगा… ओजोन की मात्रा जब आधी हो जाएगी…तो उस दौरान जितने भी लोग समुद्र किनारे लेटे हुए होंगे, वे सभी पल झपकते ही सनबर्न के शिकार हो जाएंगे… आसमान का रंग नीला कम और काला ज्यादा लगेगा.. ऑक्सीजन गायब होते ही जमीन धंस जाएगी… पृथ्वी पर मौजूद सारे जीव 10 से 15 किलोमीटर नीचे आ गिरेंगे… कहा जा सकता है महज 5 सकेंड के लिए ऑक्सीजन पृथ्वी पर न हो, तो सब कुछ तबाह हो सकता है…

यहां आपको बताते चलें हमारी पृथ्वी खतरे में है… क्योंकि
किसी वयस्क व्यक्ति को जिंदा रहने के लिए जितनी ऑक्सीजन की जरूरत है, वह उसे 16 बड़े-बड़े पेड़ों से मिल सकती है। लेकिन पेड़ों की अंधाधुँध कटाई से उनकी संख्या दिनों दिन कम होती जा रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि,,,,

हमारी धरती अपनी धुरी से 1 डिग्री तक खिसक गई है और ग्लोबल वार्मिंग शुरू हो चुकी है। तापमान बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन हो रहा है। वायु प्रदूषण से हर वर्ष 20 लाख लोग मारे जाते हैं। यह प्रदूषण जल्द ही नहीं रोका गया तो प्रतिवर्ष इस कारण 4 लाख 70 हजार लोगों की मौत होने का आंकड़ा बढ़ता जाएगा। एनवायरमेंटल रिसर्च लेटर्स के शोध से पता चला कि मानवीय कारणों से फैल रहे प्रदूषण के कारण ओजोन परत का छिद्र बढ़ता जा रहा है। इस प्रदूषण के कारण ही कैंसर जैसे घातक रोग बढ़ते जा रहे हैं। इसके अलावा अनजान रोगों से लोगों की मृत्यु की आंकड़े भी बढ़ते जा रहे हैं।

अगर पृथ्वी तेज घूमने तो क्या होगा ?

तेज़ी से घूमने लगे? किसके ? खुद के अक्ष के या सूर्य के? दोनों स्थिति में जवाब अलग अलग होगा….खुद के अक्ष के चारो और रिवॉल्व/ मिनट बढ़ेंगे तो अपकेंद्रिय बल बढ़ेगा जिससे आप अपने भार में कमी महसूस करेंगे , अधिक तेज घूमने से आप पृथ्वी की सतह से अलगाव भी देख सकते है।

पैरो तले जमीन का घर्षण गुणांक का मान कम है तो आप पीछे की तरफ धक्का भी महसूस करेंगे…हो सकता है घर के बाहर बिजली का खंभा टूट के सीधा आपके सर पे आ गिरे या पड़ोसी का पिज़्ज़ा उसके हाथ से छूट के सीधा आपके मुंह में आ जाए 🤣..

दिन 24 घंटे से कम होने लगेंगे ..भूमध्य रेखा पे पानी की कई फुट ऊंची दीवार बन जाएगी… बाकी मेडिकल प्रॉब्लमस जैसे ब्लड प्रेशर ,आक्सीजन की कमी से हाइपॉक्सिया, जैविक घड़ी में बदलाव आदि भी होंगे

क्या होगा अगर उल्कापिंड पृथ्वी से टकरा जाये?

आसमान में कभी-कभी एक तरफ से दूसरी तरफ बहुत तेजी से जाते हुए अथवा धरती पर गिरते हुए जो ( या आसमान में चमकते हुए ) पिंड दिखाई देते हैं, उन पिंडो को उल्का (meteor) और साधारण भासा में ‘टूटते हुए तारे’ या ‘लूका’ कहते हैं। उल्काओं पिंडो का जो टुकड़ा वायुमंडल में जलने से बचकर पृथ्वी तक पहुँचता है,यूज टुकड़े को उल्कापिंड (meteorite) कहते हैं।

उल्कापिंड धरती से टकराने से क्या होगा, यह उस उल्कापिंड के साइज़ पर निर्भर करता है। वो एक पत्थर से लेकर एवेरेस्ट पर्वत जितना बड़ा हो सकता है। यह माना जाता है कि डायनासौर का अंत एक बड़े उल्का पिंड के टकराने से हुआ था। उससे टकराने से विस्फ़ोट, भूकंप और सुनामी जैसी घटना हुआ , और उससे बहुत बड़ी आग लगी। उसके धुआं से आसमान ढक गया, कई दिनों तक सूर्य का प्रकाश धरती तक नहीं पंहुचा, और अधिकतर जीव मर गए।

अगर फिर से उल्कापिंड धरती से टकराते है, तो फिर से विस्फोट होगा, परंतु यह उस उल्कापिंड पर निर्भर करता है, कि वह कितना बड़ा है। जितना बड़ा उल्कापिंड होगा उतनी ही बड़ी तबाही होगी ओर जितना चोता उतना कम। अगर उसका पिंड फिर से टकराया तो फिर से जान माल का नुकसान होगा। ओर क्या पता भविष्य में यह दुनिया उल्कापिंड के टकराने से ही ख़तम हो जाए।

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